अक्षय तृतीया: अर्थ, महत्व और यह दिन क्यों देता है अनंत फल
- Neha Chauhan
- 17 अप्रैल
- 1 मिनट पठन
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसे “सिद्ध मुहूर्त” माना जाता है।
इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।

“अक्षय” तृतीया का अर्थ क्या है?
“अक्षय” का अर्थ है—जो कभी समाप्त न हो,जो कभी कम न हो।
इस दिन किए गए कार्यों को “अक्षय फल” प्राप्त होता है, अर्थात उनके परिणाम समय के साथ बढ़ते रहते हैं।
शास्त्रों में अक्षय तृतीया महत्व
अक्षय तृतीया का उल्लेख Skanda Purana, Bhavishya Purana और Matsya Purana में मिलता है।
इन ग्रंथों में इस दिन:
दान
जप
पुण्य कर्म
को अत्यंत फलदायी बताया गया है।
ज्योतिषीय महत्व
इस दिन:
सूर्य मेष राशि में उच्च होते हैं
चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च होते हैं
इससे आत्मा और मन दोनों मजबूत होते हैं।
जब मन और आत्मा एक दिशा में होते हैं, तब किए गए कार्य टिकाऊ होते हैं।
पौराणिक कथाएं
Parashurama का जन्म
Mahabharata की रचना का प्रारंभ
Draupadi को Krishna द्वारा अक्षय पात्र प्राप्त होना
इन सभी घटनाओं में एक समान तत्व है—अनंतता।
असली संदेश
अक्षय तृतीया हमें सिखाती है:
👉 जो सही भाव से शुरू किया जाए… वह चलता रहता है
यह केवल धन तक सीमित नहीं है, बल्कि:
आदतें
विचार
कर्म
सब पर लागू होता है।
कैसे मनाएं अक्षय तृतीया?
अन्न दान करें
ध्यान करें
एक अच्छा संकल्प लें
अक्षय तृतीया हमें यह याद दिलाती है कि:
आज शुरू किया गया कार्य…आपके प्रयास से आगे भी चलता रहेगा।
इसलिए सोच समझकर शुरुआत करें।


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