कुब्जिका जयंती: छुपी हुई शक्ति और तंत्र की रहस्यमयी देवी
- Neha Chauhan
- 15 अप्रैल
- 1 मिनट पठन
कुब्जिका जयंती एक अत्यंत गूढ़ और तांत्रिक परंपरा से जुड़ा हुआ दिन है, जो देवी कुब्जिका को समर्पित है। यह देवी सामान्य रूप से पूजा जाने वाली देवियों में नहीं आतीं, बल्कि उनका स्थान साधना और आंतरिक अनुभव में है।

कुब्जिका कौन हैं?
“कुब्जिका” का अर्थ होता है “टेढ़ी” या “मुड़ी हुई।”लेकिन यह कमजोरी नहीं है।
यह है संकुचित शक्ति।
यह वही अवस्था है जब Kundalini जागृत होने से पहले कुंडलित रहती है।
तंत्र और शास्त्र में कुब्जिका
कुब्जिका का वर्णन मुख्य रूप से Kubjikāmatatantra में मिलता है।
यह तंत्र शैव परंपरा के अंतर्गत आता है और इसमें कुब्जिका को पराशक्ति कहा गया है।
उनका संबंध Bhairava से है—जो शिव का उग्र और निराकार स्वरूप हैं।
कुब्जिका का गहरा अर्थ
कुब्जिका हमें सिखाती हैं कि:
👉 हर ऊर्जा को तुरंत व्यक्त करना आवश्यक नहीं है👉 कुछ शक्तियां समय के साथ परिपक्व होती हैं
जब जीवन में ठहराव आता है…तो वह रुकावट नहीं… तैयारी भी हो सकती है।
मनोवैज्ञानिक अर्थ
कुब्जिका हमारे भीतर रहती हैं:
दबे हुए भावों में
अनकहे विचारों में
अधूरी इच्छाओं में
यह सब समाप्त नहीं होता…बल्कि एकत्रित होकर शक्ति बन जाता है।
कुब्जिका जयंती कैसे मनाएं?
यह दिन शांति और आत्मचिंतन का है:
ध्यान करें
अपने विचारों को लिखें
अपने भीतर की ऊर्जा को महसूस करें
कुब्जिका हमें सिखाती हैं:शांति भी शक्ति है।


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