पराशर ऋषि जयंती: वह ऋषि जिन्होंने जीवन को समझने का विज्ञान दिया
- Neha Chauhan
- 18 अप्रैल
- 2 मिनट पठन
पराशर ऋषि जयंती उस महान ऋषि को समर्पित है जिन्होंने जीवन, कर्म और समय को समझने का एक संपूर्ण ढांचा दिया। पराशर ऋषि केवल ज्योतिष के आचार्य ही नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने जीवन को व्यवस्थित रूप में समझाया।

पराशर ऋषि जन्म और प्रारंभिक जीवन
पराशर ऋषि का जन्म सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ था। उनके पिता शक्ति ऋषि की मृत्यु उनके जन्म से पहले ही हो चुकी थी। उनके दादा Vashistha इस घटना से अत्यंत दुखी थे।
कथाओं के अनुसार, पराशर ने गर्भ में ही वेदों का उच्चारण करना शुरू कर दिया था। यह उनकी अद्भुत चेतना का प्रतीक है।
क्रोध से ज्ञान की ओर
जब पराशर को अपने पिता की मृत्यु के बारे में पता चला, तो उन्होंने राक्षसों के विनाश के लिए यज्ञ प्रारंभ किया।
लेकिन वशिष्ठ ऋषि ने उन्हें रोका और समझाया कि यह क्रोध से प्रेरित है, धर्म से नहीं।
यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था।
उन्होंने क्रोध को त्यागकर ज्ञान का मार्ग चुना।
बृहत पराशर होरा शास्त्र
पराशर ऋषि द्वारा रचित Brihat Parashara Hora Shastra आज भी वैदिक ज्योतिष का आधार है।
इसमें ग्रह, राशि, भाव और दशा का विस्तार से वर्णन किया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ
Vishnu Purana
पराशर गीता
वृक्षायुर्वेद
इनसे स्पष्ट होता है कि उनका ज्ञान केवल ज्योतिष तक सीमित नहीं था।
महाभारत से संबंध
पराशर ऋषि और सत्यवती के पुत्र थे Ved Vyasa।
वेद व्यास ने ही Mahabharata की रचना की।
इस प्रकार पराशर महाभारत की पूरी कथा के मूल में हैं।
निष्कर्ष
पराशर ऋषि हमें सिखाते हैं कि:
जीवन न तो पूरी तरह भाग्य है…और न ही पूरी तरह नियंत्रण में है।
बल्कि यह एक संतुलन है—जिसे समझना ही सच्चा ज्ञान है।


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